स्व. श्री गेंदालाल
शर्मा
‘लाखेरी दर्शन’
फिल्म बनाने वाले मुख्य किरदार प्रिय पवन शर्मा के नानाजी स्व. गेंदालाल शर्मा एक
ऐसे व्यक्ति थे जिनके बारे में यदि मैं कहूं कि वे सज्जनता की प्रतिमूर्ति थे तो कोई
अतिशयोक्ति नहीं होगी. वे मेरे लाखेरी आने के कुछ समय बाद सन १९६१ या ६२ में एक
टाइपिस्ट के पद पर ए.सी.सी. में भर्ती हुए थे. मूल रूप से आगरा के रहने वाले थे, पर
लाखेरी में किस स्रोत से उनका पदार्पण हुआ मुझे ज्ञात नहीं है. वे अंग्रेजी और
हिन्दी दोनों भाषाओं की टाइपिंग तथा शार्टहैण्ड लेखन में माहिर थे. उनकी गंभीर
कार्यशैली और काम के प्रति समर्पणभाव से जूनियर पद से कई प्रमोशन पाते हुए प्लांट
हेड के सेक्रेटरी बने और ९० के दशक में सम्मान पूर्वक रिटायर हुए.
मैंने कोआपरेटिव सोसाइटी
के सेक्रेटरी/चेयरमैन के पद पर रहते हुए प्रशासनिक मामलों में हमेशा उनकी
सलाह/सेवाएँ ली थी. मेरी एक लघु पुस्तिका ‘माँ के पत्र’ (किशोर बेटियों के
ज्ञानार्थ) का उन्होंने टाइपिंग/सम्पादन भी किया था.
पारिवारिक जीवन में
उन्होंने अपने बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा का मानदंड रखा. उनका बड़ा बेटा राजेन्द्र
माइनिंग इंजीनियर है, जो कि कोल इंडिया में सीनियर अधिकारी के रूप में कार्यरत है.
बिचला बेटा मुकेश जयपुर में मेडिकल की तयारी कर रहा था, परन्तु दुर्भाग्यवश, बाद में उसकी खबर नहीं मिली. छोटा बेटा नरेंद्र (मैकेनिकल इंजीनियर) आगरा में अपना खुद का व्यवसाय करता है.
बेटी श्रीमती निर्मला शर्मा (अध्यापिका) हैं; इनका ही सुपुत्र पवन शर्मा है जो
फिल्ममेकिंग टेक्नोलोजी की डिग्री लेकर इस फील्ड में अच्छा नाम कमा रहा है. इन्होने
हाल में ‘लाखेरी दर्शन’ नाम से एक यादगार फिल्म बनाई है, जो यू ट्यूब पर भी उपलब्द्ध है. इसमें
लाखेरी से सम्बंधित सामाजिक, सांस्कृतिक, व भौगोलिक जानकारी मिलती है. मुझे विशेष
प्रसन्नता इस बात पर है कि इस फिल्म को बनाने की प्रेरणा उन्होंने मेरे लिखी
पुस्तक ‘लाखेरी पिछले पन्ने’ से भी ली है. मैंने फिल्म देखकर उनको इस पुस्तक के सफल समायोजन
के लिए अनेक शुभ कामनाएं दी हैं.
परिवार के इस सदस्य की इस सफलता
के पीछे स्व. गेंदालाल शर्मा जी का अप्रत्यक्ष आशीर्वाद ही है. हम उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं.
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