मंगलवार, 9 जनवरी 2018

अटलांटिक के उस पार -१२: The Sixth Floor Museum at Dealey Plaza



इस फोटोग्राफ में मैं उस जगह खड़ा हूँ, जहां पर १९६३ में सयुंक्त राज्य अमेरिका के एक राष्ट्रपति जॉन ऐफ. कैनेडी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. वह एक मुखर स्पष्टवक्ता राजनेता के रूप में जाने जाते थे. आकर्षक व्यक्तित्व के धनी थे और विश्व में शीत युद्ध की जबरदस्त छाया के दौरान शक्तिशाली लीडर के रूप में स्थापित हो चुके थे. अमेरिका के ३५ वें राष्ट्रपति कैनेडी सबसे कम उम्र वाले राष्ट्रपति थे. एक अमीर व्यापारी खानदान में जन्मे जॉन ऐफ. कैनेडी द्वितीय विश्वयुद्ध में अमेरिकी नेवी में भी अपनी सेवा दे चुके थे, तथा बाद में १९४७ में प्रतिनिधि सभा में रहे, और १९५३ से १९६० तक सीनेटर रहे.

मैं जब २३-२४ साल का था, तब भी नियमित रूप से विश्व समाचार भी पढ़ा सुना करता था. मुझे अच्छी तरह याद है जब राष्ट्रपति कैनेडी की मृत्यु का समाचार ट्रांजिस्टर पर सुना था. यद्यपि तब मैं किसी राजनैतिक विचारधारा या संकल्पों से जुड़ा हुआ नहीं था, समाचार सुनकर मैं बहुत दु:खी हुआ था क्योंकि वे एक युवा आदर्श थे.

मैं अभी उस बिल्डिंग की छटी मंजिल पर जाकर उस स्मारक म्यूजियम को देख-सुन आया हूँ जिसमें बड़े बड़े चित्रों, लेखों व ऑडियो-वीडियो द्वारा जॉन ऐफ. कैनेडी को ज़िंदा रखा गया है. जब मैं टेक्सास राज्य के डलास शहर के डाउन टाउन में Sixth Floor Museum at Dealey Plaza  नामक संग्रहालय में पहुंचा तो वहां पर्यटकों की लम्बी कतार थी. सभी को व्यवस्था की तरफ से $१६ ($१४ सीनियर सिटिजन्स के लिए) एंट्री फीस लेकर एक guiding tape recorder with head phone  दिया गया, जिससे हर दृश्य का विस्तार से वर्णन सुना जा सकता था. पूरे कार्यक्रम में कैनेडी के कुछ वाक्य बार बार याद आ रहे थे जैसे, “A man may die, nation may rise and fall, but an idea lives on.”

उन्होंने अपने देशवासियों से कहा था कि, “आप ये मत सोचिये कि राष्ट्र आपको क्या दे रहा है, आप सोचिये कि आप राष्ट्र को क्या दे रहे हैं.”

उनकी एक मशहूर पुस्तक Profiles in Courage को पुलित्जर पुरूस्कार प्रदान किया गया था. कैनेडी ने विश्व में परमाणु निशस्त्रीकरण का नया अध्याय शुरू किया. सारे विश्व को प्रभावित करने वाली इस शक्शियत का इस तरह क़त्ल कर दिया जायेगा / करवा दिया जाएगा, ऐसा किसी ने सोचा भी न था. यद्यपि अमेरिकी इतिहास में वे चौथे राष्ट्रपति थे, जिनको अकाल मार दिया गया था.

संग्रहालय में उनके सुखी पारिवारिक जीवन की झांकिया भी चित्रों में दर्शाई गयी हैं, पर दुखद अंत मन में टीस पैदा करता है. यह सब देखकर महात्मा गांधी स्व. इंदिरा गांधी व उनके पुत्र स्व. राजीव गांधी के जीवन बलिदानों की याद ताज हो आई. ये सभी अब इतिहास के अमर पात्र बन गए हैं.
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1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (10-01-2018) को "आओ कुत्ता हो जायें और घर में रहें" चर्चामंच 2844 पर भी होगी।
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    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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