गुरुवार, 18 अगस्त 2011

गीत

तुम सुबह तक बाट मेरी जोहना
मैं प्रणय के गीत लेकर आ रहा हूँ.

मन के तारों में उलझ कर रह गए जो
मैं मिलन के गीत लेकर आ रहा हूँ.

तुम प्रिये ! खुशियों को अपने न्योंत लेना
मैं स्वयं सौगात बन कर आ रहा हूँ.

दीपिका की बातियों से पूछ लेना
हर लौ में तेरी लौ लगाए आ रहा हूँ.

वायु की धडकन की सरगम जानती है
मैं सुहागों को संजोये आ रहा हूँ.

तुम सुहाने अनछुए पल बाँध रखना
मैं इन्हें मदहोश करने आ रहा हूँ.
         ***

2 टिप्‍पणियां:

  1. Ghar mein sab ko aapka yeh geet bahut pasand aaya aur voh sab kae rahey hain :
    Kya Khoob... likhtey ho,
    Bada Achcha likhtey ho..
    Likhtey Raho, hum padhtey rahein

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  2. अति सुन्दर गीत, इसको पढ़कर अपना जमाना याद आ गया ...

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