शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

फलित ज्योतिष

          अल्मोड़ा से कौसानी जाते हुए एक स्थान आता है, पथरिया, वहां से सामने पहाडी पर बसे गाँव पर नजर डालेंगे तो अद्भुत नजारा दिखाई देता है. दृश्य धवल दन्त-पंक्ति सा लगता है जिसे कैमरे में कैद करने  का मन करता है. वैसे तो मनान क्षेत्र के तमाम गाँव ऐसे ही घने बसे हैं, जिन पर एक सदी पहले से ही जनसंख्या का दबाव रहा. खेती की जमीन कम होने से लोग नौकरी की तलाश में दिल्ली लखनऊ जैसे बड़े शहरों की तरफ  रुख करते गए. 

              ज्यूला गाँव के भैरबदत्त, गणानाथ से मिडिल पास करके अपने मामा के पास नैनीताल आ गए. मामा जी के पड़ोस में पोस्टमास्टर ख्यालीराम जोशी रहते थे. उनसे मामा जी ने भानजे की नौकरी की चर्चा की तो उन्होंने कहा उनके पास एक हरकारे की जगह खाली है. हरकारा यानि एक स्टेशन से दूसरे स्टेशंन  तक डाक का थैला पहुंचाने वाला. उन दिनों जहाँ मोटर मार्ग नहीं थे. वहां इसी तरह डाक लाई ले जाई जाती थी. हरकारे रात में भी चलते थे. उनके पास एक लम्बी लाठी होती थी जिस पर बड़े-बड़े घुँघरू बंधे होते थे. घुँघरू इसलिए कि उनकी आवाज से रास्ते में जंगली जानवर, भूत-पिचास सब दूर रहते थे. भैरबदत्त हरकारे के काम में लग गए .

          एक साल बाद भैरबदत्त को पोस्टमैन बनाकर रामनगर भेज दिया गया. संयोग से वे पंडित रामदत्त जोशी पंचांग वालों के निकट रहने लगे. यहाँ से उनको नयी ऊर्जा व दिशा प्राप्त हुई कि वे अध्यनशील हो गए. जब भी समय मिलता, वे पंडित जी के सानिध्य में रहते और नई-नई ज्ञान की बातें सीखते. धीरे-धीरे वे गणित ज्योतिष में पारंगत हो गए. कुंडलियाँ बनाना, कुंडलियाँ मिलाना व अन्य ज्योतिषीय गणना वे करने लगे. ज्ञान तो ज्ञान है. इसका कोई अंत नहीं. दिन में चिट्ठी-मनीआर्डर बांटते और बाकी समय अध्ययन में लगाते थे.

          एक दिन उनकी मुलाक़ात एक गढ़वाली पंडित देवीप्रसाद नौटियाल से हुई. देवीप्रसाद जी उनकी प्रतिभा से बहुत प्रभावित हुए. उन्होंने अपनी एक पुस्तैनी पुस्तक भृगु संहिता उनको प्रदान की. भृगु संहिता फलित ज्योतिष की मान्य पुस्तिका है जो अपने मूल रूप में कम ही मिलती है. यह संहिता हर व्यक्ति की जन्म-कुंडली से पूर्व जन्म व् भविष्य की सारी व्याख्याएं करती है. भैरबदत्त ने तमाम पुस्तक पढ़ी, समझी और वे आत्मविश्वास लवरेज हो गए. 

         इस बीच उनका विवाह भी हो गया था. भगवत कृपा से चार बेटों व दो बेटियों के पिता बन चुके थे. विभागीय अधिकारियों की अनुकम्पा से बदली करवाकर बैजनाथ पोस्ट आफिस में आ गए थे, जहाँ वे लगभग बीस वर्ष कार्यरत रहे. उनको सुपरवाइजर बना दिया गया. सरकारी नौकरी की इस यात्रा में अठावन वर्ष की उम्र होने पर वे रिटायर होकर अपने गाँव ज्यूला लौट आये. चारों बेटे अच्छी नौकरियों में लगे थे. सभी बेटा-बेटियों की शादी करके जिम्मेदारियों से पहले ही मुक्त हो चुके थे. सब प्रकार से सुखी थे. गाँव-पड़ोस व मित्रों को ज्योतिष संबंधी सलाह देकर मदद करते रहते थे.

         कुछ समय से उनके स्वास्थ्य में गिरावट आने लगी, पेट में दर्द व संग्रहणी जैसी शिकायत रहने लगी. सीधे दिल्ली अपने बेटे के पास चले गए. सफदरजंग अस्पताल में ईलाज करवाकर चार महीनों में वापस घर आ गए. पर बीमारी गयी नहीं. एक दिन बैठे-बैठे उन्होंने सोचा कि अपनी खुद की कुंडली को भी देखना चाहिए. सभी गुणा-भाग करके भृगु संहिता के अनुसार अपनी मृत्यु की तारीख व समय की गणना कर डाली. मृत्यु-भय तो था ही, सभी प्राणियों में होता है. उस निश्चित तारीख से पंद्रह दिन पहले उन्होंने अपने पुत्र-पुत्रियों व उनके परिवारों को अपने पास बुला लिया. सभी नाते-रिश्तेदार मिलने को आने लगे. घर में सब कुछ होते हुए भी बड़ा तनाव था, आशंकाएं थी, मृत्यु की प्रतीक्षा थी.

         एक सप्ताह पहले उन्होंने अन्न का त्याग कर दिया. केवल दही और पंचामृत का सेवन करने लगे. घर में
भजन-कीर्तन करके माहौल को हल्का करने का प्रयास बच्चों ने किया. पोता-पोती उत्कंठित थे कि दादा जी किस तरह स्वर्ग को जायेंगे?

         पर वे गए नहीं. मृत्यु की तारीख को भले चंगे हो गए. सब लोग अचंभित और खुश थे. उन्होंने खीर-पूड़ी बनवाई और खुद भी खाई. यों एक दिन निकला, दो दिन निकले, एक सप्ताह निकल गया.भैरबदत्त नियमित स्वस्थ दिनचर्या में आ गए. दरअसल पंचामृत तथा दही के सेवन से उनके स्वास्थ्य में चमत्कारिक सुधार हो गया था.

         भैरबदत्त ने कई वर्षों के पातड़े, ज्योतिष संबंधी साहित्य बाहर निकाल कर अग्नि को समर्पित कर दिया.
बोले, "सिर्फ गणित ज्योतिष सही है, फलित ज्योतिष सब गप है." उसके बाद भी वे दो वर्ष जीवित रहे.

                                              ***

3 टिप्‍पणियां:

  1. Manaan mere mata-pita ki janam bhoomi hai, pathriya ko bhi suna hai maine unki baatoh mai,
    achcha aga ,thanks

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  2. kahani bahut pasand aayi, hum log dahi ka use aur bhi jyada karne lagenge...

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  3. अति सुंदर ! काश सभी ज्योतिष अपना भविष्य इसी तरह आजमा लेते जनता को मूर्ख बनाने से पहले ...

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