मंगलवार, 21 अगस्त 2012

चुहुल - ३०

(१)
एक दयालु भेड़िये ने एक बकरी से कहा, “क्या तुम मेरे घर की शोभा बढ़ाने आ सकती हो?”
बकरी बोली, “मैं जरूर आती, पर मुझे मालूम है कि आपका वह सुहाना घर आपके पेट में है. क्षमा चाहती हूँ.”

(२)
एक नौकर अपने मालिक से बड़े अदब से बात करता था. वेतन बढ़ाने के लिए बोला, “सर, मेरी पत्नी कहती है कि वेतन बढ़ाने के लिए आपसे निवेदन करूँ.”
सेठ जी बोले, “ठीक है मैं भी अपनी पत्नी से पूछ कर बताऊंगा.”

(३)
एक स्टेज
आर्टिस्ट से पत्रकार ने कहा, “आपने नाटक में दब्बू पति की बहुत स्वाभाविक एक्टिंग की है.”
कलाकार का संक्षिप्त उत्तर था, “इसका पूरा श्रेय मेरी पत्नी को जाता है.”

(४)
एक महिला, अपनी छोटी सी बेटी के बारे में, अपने दार्शनिक पति को खुशी खुशी बताने लगी, “अपनी पिंकी ने चलना शुरू कर दिया है.”
पति ने व्यग्रता से पूछा, “कब से?”
“एक महीना हो गया.”
पति चिंतातुर होकर बोले, “तब तो अभी तक वह बहुत दूर पहुँच गयी होगी.”

(५)
एक लड़का अपनी प्रेमिका से मिलने उसके घर जा पहुँचा. लड़की की माँ ने दरवाजा खोला. वह जानती थी कि आगंतुक उसकी बेटी का दोस्त है. उसने बेटी को आवाज दी और दोनों को बैठक में बैठने को कहा, खुद रसोई में काम करने लगी.
लड़की का सात साल का भाई आकर दोनों के बीच में बैठ गया. लड़की चाहती थी कि वह वहाँ से कहीं चला जाये. इसलिए बोली, “देख, बाहर तेरे दोस्त आये हुए हैं. तुझे खेलने के लिए बुला रहे हैं.”
इस पर भाई बोला, “मम्मी ने कहा है कि जब तक ये बदमाश यहाँ है तू कहीं मत जाना.”

***

5 टिप्‍पणियां:

  1. uncle eid mubarak
    thanx for chuhul

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  2. .


    :)
    मज़ा आ गया सर जी …आदरणीय पुरुषोत्तम पाण्डेय जी
    सादर प्रणाम !

    जीवन के लिए हास्य भी आवश्यक है … आपकी चुहुल हमेशा आनंदित करती हैं … आभार !



    ( पिछले दिनों न देखी जा सकी वो कुछ पुरानी पोस्ट्स भी देखी है अभी …
    …तमाम रचनाओं के लिए बधाई !)

    …आपकी लेखनी से सुंदर रचनाओं का सृजन होता रहे, यही कामना है …
    शुभकामनाओं सहित…

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