बुधवार, 28 दिसंबर 2011

चुहुल-१३


                                     (१)
एक मुस्लिम महिला अपने चार बच्चों के साथ जयपुर की ट्रेन पकड़ने के लिए सवाई माधोपुर के रेलवे प्लेटफार्म पर आ गयी, पर ट्रेन लेट थी तो बच्चों को खाना खिलाने के लिए घर से लाई हुई रोटियों की पोटली के साथ एक पेड़ के नीचे बिठा कर पानी लेने नल पर गयी. जब तक वह वापस आई तो देखा एक बन्दर रोटी की पोटली लेकर पेड़ पर चढ़ गया और मजे से तोड़ तोड़ कर खा रहा था.
महिला को बड़ा दुःख हुआ, लेकिन कुछ कर नहीं सकती थी, ऐसे में उसने अपना रोष इन शब्दों में व्यक्त किया, बड़ा आया हनुमान की औलाद... मुसलमानों की रोटी खा रहा है.

                                        (२)
एक पागल व्यक्ति ने अपने मुँह पर अंगुली रख कर सिसकारा किया और बोला, सब लोग चुप हो जाओ एक अजीब सी आवाज आ रही है.
सभी उपस्थित लोग मौन हो गए लेकिन दो मिनट तक जब कोई आवाज नहीं सुनाई दी तो एक ने कहा, हमें तो कोई आवाज सुनाई नहीं दे रही है.
पागल बोला अरे, एक-दो मिनट में कैसे सुनाई देगा? मैं पूरे दो घन्टे से कान लगाए बैठा हूँ, मुझे अभी तक सुनाई नहीं पडी.

                                         (३)
एक शराबी, नशे में धुत्त, रात को १२ बजे घर लौटा और बाहर लगे ताले को खोलने का प्रयास कर रहा था पर हाथ इस कदर हिल रहे थे कि ताला और चाबी का कांटेक्ट नहीं हो पा रहा था. देर तक खट-पट की आवाजें सुन कर पड़ोसी बाहर निकल कर आया और बोला, क्यों भाई ताला नहीं खुल रहा है क्या?
इस पर शराबी ने कहा. क्या करूं मेरा पूरा मकान हिल रहा है, तुम जरा मदद करो, इस मकान को पकड़ कर रखो, मैं ताला खोलता हूँ.

                                          (४)
एक मुच्छड़ ने चलाते-चलाते अपनी साईकिल एक महिला से जा भिड़ा दी. महिला को बहुत गुस्सा आया बोली, शर्म करो, इतनी बड़ी बड़ी मूछें रखते हो और साईकिल से टक्कर मारते हो?
मुच्छड़ बोला, बहिन जी, माफ करना, ये मूछें हैं साईकिल की ब्रेक नहीं.

                                          (५)
एक बार गीदड़ों की बड़ी पंचायत बैठी और तय हुआ कि अपना भी कोई सरपंच चुना जाये. सो एक तेज तर्रार गीदड़ को सरपंच चुन लिया गया, पर सब की शक्ल एक सी होने के कारण पहचान के लिए सरपंच की पूंछ पर दो फुट का एक डंडा बाँध दिया गया.
हुआ ये कि अगले ही दिन कुछ कुत्ते, गीदड़ों के पीछे लग गए. गीदड भाग कर जल्दी से अपनी खोह (धरती के अन्दर सुरँग नुमा गुफा) में घुस गए पर सरपंच साहब का डंडा खोह के मुहाने पर तिरछा अटक कर रह गया. दूसरे गीदड़ों ने आवाज दी, सरपंच जी जल्दी घुसिए.
सरपंच बोला, कैसे घुसूं, मेरी सरपंची अटक गयी है.
                                          *** 

1 टिप्पणी:

  1. वाह . बहुत उम्दा,सुन्दर व् सार्थक प्रस्तुति.शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामना
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