रविवार, 24 फ़रवरी 2013

दस्तूर पुरातन

मैं श्वेत कमल सा पुष्प अफीम का
दम्भी, गन्धी और नशीला,
तुम मेढ़ के उस पार, पीली सरसों,
नेह-स्नेह और शर्मीली सी.

बयार बसंती छूकर आती तुमको
मधुप, कीट-पतंगे दे जाते संदेशे.
मैं मजबूर कि पहरे हैं भारी मुझपर
चीरा जाऊंगा इसी अपराध में इक दिन

मैंने अनजाने में क्यों यों चाहा तुमको,
तुम तो नारी हो कोमल-प्यारी-मनभावन
काटी-पीसी जाओगी, कोल्हू में होगा मर्दन.
कि तुमने भी तो सैन किये थे अल्हड़पन में.

मैं कोई सर, तुम कोई जलधार नहीं
जो मिल पायें जाकर आगे किसी डगर
ये तो ना कोई बात नई है दस्तूर पुरातन
चाहना की भावना की, है जग दुश्मन.
                    ***

27 टिप्‍पणियां:

  1. उपमायें कल्पनाओं में डूब जाने को विवश करती हैं।

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  2. आपकी टिपण्णी हमें प्रासंगिक बनाए रहती है ,ऊर्जित करती है .शुक्रिया आपका तहे दिल से .चर्चा मंच में हमें बिठाके आप हमारा मान बढाते हैं शुक्रिया .

    आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है -मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  3. आपकी टिपण्णी हमें प्रासंगिक बनाए रहती है ,ऊर्जित करती है .शुक्रिया आपका तहे दिल से .

    आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है -मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  4. वाह!
    आपकी यह प्रविष्टि कल दिनांक 25-02-2013 को चर्चामंच-1166 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  5. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  6. इस टिप्पणी को एक ब्लॉग व्यवस्थापक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  8. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  9. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  10. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  11. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  12. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  14. बहुत बढ़िया प्रयोग किये हैं आपने इस रचना में .रूपक तत्व का बेहतरीन समावेश .विश्लेषण और वर्रण दोनों तत्व लिए है रचना .कल भी इस पोस्ट पर टिपण्णी की थी .कृपया स्पेम से निकालें .शुक्रिया आपकी टिपण्णी का .

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  15. आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है .-मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  16. आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है .-मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  17. आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है .-मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  18. आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है .-मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  19. आपकी प्रस्तुति के नाम एक शैर -मकतबे इश्क का दस्तूर निराला देखा ,उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक याद किया .बहुत बढ़िया लिखा है .-मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ....

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  20. "मैं फूल अफीम का तुम बसंत की पीली पीली सरसों ...."

    बहुत सुंदर रचना .

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