शनिवार, 16 मार्च 2013

चुहुल - ४६

(१)
एक कंजूस-मक्खीचूस आदमी मृत्युशय्या पर पड़ा था. उसके तीन बेटे थे और वे तीनों ही मूंजीपने में बाप से दो कदम आगे ही रहते थे. पिता के अन्तिम संस्कार करने के बारे में तीनों पास में बैठ कर बतिया रहे थे.
बड़ा लड़का बोला, “पिता जी को शमशान घाट तक ले जाने के लिए कोई ऑटो रिक्शा करना पडेगा, ऑटोवाला २०० रूपये लेगा.”
दूसरा बेटा बोला, “अगर हम साइकिल-रिक्शा करके ले जायेंगे तो तो ५० रुपयों में ही पहुँचा देगा.”
तीसरा लड़का बोला, “इससे तो अच्छा है कि एक हाथ ठेला किराए पर ले लेंगे, २० रुपयों मे काम निबट जाएगा.”
बुड्ढा अर्धचेतना में पड़े पड़े उनकी बातों को सुन रहा था, धीरे से बोला, “बीस रूपये भी क्यों खर्चते हो, मेरा सफ़ेद कुर्ता पायजामा ले आओ, मैं पैदल ही चले चलूँगा.”

(२)
एक थानेदार साहब ने कुछ सामान लाने के लिए अपने नौकर को पास के पंसारी की दूकान पर भेजा. नौकर एक घन्टे के बाद लौट कर आया. देरी का कारण पूछने पर उसने बताया, “दूकान पर बहुत सारे ग्राहक थे. दूकानदार मेरे तरफ देख भी नहीं रहा था.”
थानेदार साहब गुस्से में लाल-पीला होकर पंसारी के सामने पहुँच कर बोले, “क्यों बे, तू इलाका हाकिम को नहीं पहचानता है? मेरे नौकर को एक घन्टे तक खड़ा रखता है, तेरी ये हिम्मत?”
पंसारी डर गया. हाथ जोड़ कर बोला, “हुजूर, गलती हो गयी. आईन्दा आपका कुत्ता भी आएगा तो मैं समझूंगा कि आप खुद ही आ गए हैं.”

(३)
एक ज्योतिषी ने महिला का हाथ देखते हुए बताया, “आपके ऊपर से कोई बड़ा साया उठने वाला है”
महिला ने कहा, “मैं समझी नहीं?”
ज्योतिषी: आपके पिता जी की उम्र अब लम्बी नहीं बचेगी.
महिला: पर मेरे पिता जी तो पाँच साल पहले गुजर चुके हैं.
ज्योतिषी: तब आपके बड़े भाई पर काल की दृष्टि है.
महिला: मेरा कोई बड़ा भाई है ही नहीं.
ज्योतिषी कुछ गंभीर मुद्रा में सोचकर बोला, “तब तो आपका छाता जरूर खो जाएगा.”

(४)
आधी रात को दरवाजे पर दस्तक हुई. मकान मालिक ने गहरी नींद से उठकर दवाजा खोला तो पाया उसका किरायेदार सामने खड़ा था. मकान मालिक ने उससे पूछा, “कहिये क्या बात हो गयी?”
किरायेदार विनीत स्वर में बोला, “भाई साहब, मैं इस महीने किराया नहीं दे पाऊंगा.”
मकान मालिक ने भौंहें तरेर कर कहा, “ये बात तो आप सुबह भी कह सकते थे?”
किरायेदार बोला, “हाँ ये सही है कि मैं ये बात सुबह भी कह सकता था, पर मैं रात भर इसी चिंता में क्यों जगता रहूँ यह सोचकर आपको कष्ट दिया.”

(५)
एक व्यक्ति मायके से आ रही अपनी पत्नी को लेने बस स्टेशन गया. पत्नी की बस पहुँचने पर उसने उसका सारा सामान उतारा. इस बीच पत्नी ने महसूस किया कि उसके आने की पतिदेव को कोई खुशी जैसी नहीं हो रही है. कोई गर्मजोशी नजर नहीं आ रही थी तो वह बोली, “देखिये वो सामने बैंच पर जो पति पत्नी बैठे हैं, उनमें पति कितने उत्साह व खुशी से बातें कर रहे हैं, और एक तुम हो मुँह लटका कर लेने आये हो.”
पति बोला, “वो जो तुम बैंच पर देख रही हो, वो पति उसे लेने नहीं बल्कि छोड़ने आया है.”
***

4 टिप्‍पणियां:


  1. चुहुल बाज़ी का ज़वाब नहीं एक से बढ़िया एक -थानेदार साहब का कुत्ता बोले तो .....साहब ही सम झूंगा .

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  2. दांत फाड़ कर हंस लिए, मजा आ गया। मेरे निकट बैठे बागेश्‍वर के रमेश काण्‍डपाल भी आपके चुटुकुलों पर खिलखिला पड़े।

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  3. वाह काफी बढ़िया रही यह चुहुलबाजी ... जय हो !


    आज की ब्लॉग बुलेटिन यह कमीशन खोरी आखिर कब तक चलेगी - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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