शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

चुहुल - ५९

(१)
एक राजनैतिक पार्टी के बड़े नेता इन दिनों बहुत परेशान हैं कि ये कल के छोकरे उनको धक्का देकर आगे बढ़ रहे हैं.
उनको टॉयलेट में घुसे हुए बहुत देर हो गयी तो पत्नी को चिंता होने लगी, दरवाजा खटखटाते हुए उनको आवाज दी, “अजी, फ्रेश होने में देर हो रही है या रूठ कर बैठे हो?” (फेसबुक से)

(२)
गाँधी जी जब बैरिस्टर थे तो उन्होंने एक मुवक्किल की पैरवी करके मदद की थी. बाद में जब गाँधी जी स्वर्ग चले गए तो एक बार फिर वही आदमी किसी केस में फंस गया. उसने अपने सपने में गाँधी जी से मुलाक़ात की और कहा, “आप जब ज़िंदा थे तो आपने मुझे बचाया, अब मुझे कौन बचायेगा?”
गाँधी जी ने भारत के करेन्सी नोटों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इनमें मेरी फोटो लगी है, यही तुझे बचायेंगे.

(३) 
ये बात उन दिनों की है जब कट्टर+आतंकवादी संगठन बब्बर खालसा हमारे पंजाब में बहुत सक्रिय था. उनको ऐसा लगाने लगा था कि अलग से खालिस्तान राज्य बनने ही वाला है.
उन अतिवादियों के कमांडरों की किसी गुप्त स्थान पर एक मीटिंग हो रही थी. एक कमांडर बोला, “बस अब हमारी जीत एक कदम दूर है.” दूसरा बोला, “ये तो ठीक है कि हमारा नया राष्ट्र बन जाएगा, लेकिन हम उसका विकास कैसे करेंगे?” तीसरा बोला, “बड़ा सरल है, हम अमरीका पर हमला कर देंगे. हमारी हार होने पर हम अमरीका के अधीन हो जायेंगे और खालिस्तान भी अमेरिका का एक राज्य हो जाएगा. अपने आप विकास करने लगेगा.”
इतने में एक बूढ़ा कमांडर बोल उठा, “अगर हम अमेरिका से जीत गए तो फिर क्या होगा?”

(४)
छोटा पप्पू दादी के पास सो रहा था. दादी ने प्यार जताते हुए कहा, “घर में हम पाँच लोग हैं, मैं हूँ, तू है, तेरे पापा हैं, तेरी मम्मी है और तेरी बहन है. जब तेरी बहन की शादी करेंगे तो चार रह जायेंगे, तेरी शादी करेंगे तो फिर से पाँच हो जायेंगे.”
पप्पू बोला “दादी, आप मर जाओगी तो हम फिर से चार ही रह जायेंगे.”
दादी गुस्सा करते हुए बोली, “चुपकर, अभी से मेरे मरने की बाट जोह रहा है, सो जा.”

(५)
एक कम आई क्यू के लिए बदनाम परिवार में पिता पुत्र के बीच संवाद हों रहा था.
बेटे ने बाप से पूछा, “अगर रास्ते में आपको एक सौ रुपयों का नोट और एक पाँच सौ रुपयों का नोट पड़े हुए मिलें तो आप कौन सा नोट उठाएंगे?”
बाप ने कहा, “मैं पाँच सौ रुपयों का नोट उठाऊँगा.”
बेटा बोला, “मैं समझ गया कि क्यों लोग हमको ‘लो आई क्यू वाले' क्यों बोलते है.”
बाप ने पूछा, ‘क्या मतलब?”
बेटा ने कहा, “आप दोनों नोट क्यों नहीं उठाएंगे?”
***

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी का लिंक कल शनिवार (21-09-2013) को "एक भीड़ एक पोस्टर और एक देश" (चर्चा मंचःअंक-1375) पर भी होगा!
    हिन्दी पखवाड़े की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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