रविवार, 29 जुलाई 2012

चुहुल - २८

(१)
पत्नी की मृत्यु के उपरान्त एक व्यक्ति विलाप कर रहा था, “जब मेरा बाप मरा तो सारे गाँव के बुजुर्गों ने हमदर्दी जताई, कहते थे, "अब तू हमें अपना बाप समझना." जब मेरी माँ मरी तो गाँव की बड़ी बूढी महिलाओं ने कहा कि “तू हमें अपनी माँ समझना.” अब मेरी बीबी गुजर गयी तो एक भी महिला ने आकर ये नहीं कहा कि "तू मुझे अपनी बीवी समझना"


(२)
एक नेपाली डोटियाल (बोझा ढोने वाला मजदूर) ने एक बड़े ऑफिसर को रास्ते चलते “शलाम शाब” बोला तो उन्होंने उसकी डोटीयाली पोशाक देख कर कहा, “कैसा है बहादुर?” और आगे बढ़ गए. वे शायद ही उसे जानते होंगे, इस पर  डोटियाल के दूसरे साथियों को बड़ा आश्चर्य हुआ कि 'इतने बड़े साहब से इसकी जान पहचान है’ एक ने उससे पूछा “दाई, यो शाब तेरी को केशे पहचानता है?”
डोटीयाल बहादुर गर्व से बोला, “अरे, मैं रेल पटरी पर लोटा लेकर बैठा था, शाब ने मेरे को देखा तो जोर से बोला, “डैम फूल,” मैं खड़ा हो गिया और शाब को शलाम कर दिया तब से पहचान हो गयी.”


(३)
एक शहरी लड़के का दोस्त गाँव से आया और उसे वह एक दिन सिनेमा दिखाने थियेटर ले गया. दो किमाम वाले पान भी चबाने के लिए रख लिए. जब पिक्चर शुरू हुई तो उसने पान निकाले, एक खुद के मुँह में डाला और एक दोस्त को दे दिया.
हाल मे बढ़िया कालीन बिछी थी इसलिए नीचे थूकने की समस्या हो गयी. दोस्त ने पूछा “कहाँ थूकूं?” उसने तरकीब बताई कि "बगल वाले की कोट की जेब में थूक दे."
“उसको मालूम पड़ेगा तो मारेगा,” दोस्त ने धीरे से कहा.
वह बोला, “अबे, मालूम नहीं पड़ेगा. जब मैंने तेरी जेब में थूका था तो तुझे मालूम पड़ा क्या?”


(४)
एक बाप ने अपने स्कूल जाने वाले बेटे से कहा “तू ज्यादा बुद्धिमान है या मैं?”
बेटा बड़ी शालीनता से बोला, “ पापा ये तो पहले से ही सिद्ध है कि बाप से बेटा ज्यादा बुद्धिमान होता है.”
“वह कैसे?” बाप ने पूछा.
बेटे ने उत्तर दिया, “देखिए, इतिहास बताता है कि जेम्स वाट, आइन्स्टाइन, महात्मा गाँधी, ओबामा या अब्दुल सलाम जैसे व्यक्तियों ने वह कर दिखाया जो उनके बाप नहीं कर सके.”
                                                
(५)
एक गाँव में एक झगड़ालू आदमी ने जिंदगी भर किसी ना किसी बात पर मुकदमे करके पूरे गाँव वालों को परेशान करके रखा. और जब मरने का समय नजदीक आया तो सब को बुला कर अपनी करनी के लिए माफी मांगने लगा, बोला, "मेरे मरने के बाद आप लोग मेरे गुनाहों की सजा मुझे जरूर देना.” एक लकड़ी का खूंटा देकर फिर बोला, “इसे मेरे शरीर में ठोक देना और सारे गाँव मे मेरी लाश घुमा कर फिर शमशान ले जाना.”
गाँव वालों ने उसकी अन्तिम इच्छा पूरी करने के लिए उसकी खूँटा गड़ी हुई लाश गाँव में घुमाई तो पुलिस को खबर हो गयी. पुलिस ने उसको मार देने के जुर्म में सारे गाँव वालों पर मुकदमा दायर कर दिया.


***

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ख़ूब!
    आपकी यह ख़ूबसूरत प्रविष्टि कल दिनांक 30-07-2012 को सोमवारीय चर्चामंच-956 पर लिंक की जा रही है। सादर सूचनार्थ

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  2. आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टि की चर्चा कल मंगलवार को ३१/७/१२ को राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी आपका स्वागत है

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