बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

चुहुल - २३

(१)
वह फटेहाल था, भीख माँग रहा था. एक साहब के पूछने पर उसने बताया कि वह बीड़ी-सिगरेट नहीं पीता है, दारू भी नहीं पीता है, और न ही जुआ खेलता है.
साहब ने उससे कहा, “मेरे साथ मेरे घर तक चल, मैं तुझे १०० रूपये दूंगा.”
भिखारी बोला, “घर तक क्यों, यहीं दे दो.”
इस पर साहब ने कहा, “अरे, मैं अपनी बीवी को दिखाना चाहता हूँ कि जिस आदमी में कोई ऐब नहीं होता है उसका क्या हाल होता है.

(२)
पत्नी – शादी से पहले आपने बताया नहीं कि आपकी रानी नाम की पहले से एक घरवाली है?
पति – मैंने तो तुमको साफ़ साफ़ बताया था कि तुमको मै रानी की तरह ही रखूंगा.

(३)
रात को पत्नी ने देखा कि पति अपने बिस्तर से गायब है. वह उसे घर में चारों ओर ढूँढने लगी तो पाया कि वह रसोई में एक कुर्सी लगा कर बैठा था और कॉफी पी रहा था. साथ ही ये भी देखा कि आँखों से आँसू टपका रहा था.
पत्नी ने उसे इस तरह उदास देख कर हड़काते हुए पूछा, “क्यों क्या हो गया?”
पति – तुम्हें याद है आज से ठीक दस साल पहले जब तुम्हारी-मेरी शादी नहीं हुई थी हम लोग चुपके चुपके मिला करते थे?
पत्नी – हाँ, याद है पर अब क्या हो गया?
पति – तुम्हारे बाप ने हम दोनों को मेरी कार की पिछली सीट पर छुपा देख कर मेरी गर्दन पकड़ ली थी, मैं बहुत डर गया था.
पत्नी – हाँ, तो?
उसने कहा था, “या तो तू मेरी बेटी से शादी कर अन्यथा मैं तुझे दस साल की जेल करवा दूंगा.”
पत्नी – हाँ, कहा था.
पति – आज उस बात को पूरे दस साल हो गए हैं. मैं सोच रहा हूँ कि अगर मैं शादी नहीं करता तो आज जेल से छूट कर आजाद हो गया होता.

(४)
एक शायर के बेटे में शायरी करने का पैदाइशी गुण जागृत हो गया. जब उसे स्कूल भेजा जाने लगा तो एक दिन अध्यापक ने उससे पूछा, “ह्वाट इज नाउन?”
लड़के ने झट उत्तर दिया,
“अर्ज करता हूँ : कुत्ता भी होता है अपनी गली का किंग,
नाउन इज द नेम आफ ए पर्सन, प्लेस, और थिंग.”

(५)
अध्यापिका बच्चों को हिन्दी सिखा रही थी, "क से कबूतर, ख से खरगोश, ग से गमला..."
बच्चे बहुत धीमी आवाज में बोल रहे थे.
अध्यापिका ने कहा, “जोर से बोलो.”
बच्चे एक साथ जोर से बोले, “जय माता दी.”
***

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी यह रचना आज बुधवार (16-10-2013) को ब्लॉग प्रसारण : 147 पर लिंक की गई है कृपया पधारें.
    एक नजर मेरे अंगना में ...
    ''गुज़ारिश''
    सादर
    सरिता भाटिया

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  2. आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा 17-10-2013 को
    चर्चा मंच
    पर है ।
    कृपया पधारें
    आभार

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  3. हा हा हा हा हा हा हा हा हं हं हं............जय माता दी।

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  4. क्या बात है इन्हें ही कहतें हैं हंसगुल्ले व्यंग्य विनोद के।

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  5. बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 19/10/2013 को प्यार और वक्त...( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 028 )
    - पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

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  6. पति – आज उस बात को पूरे दस साल हो गए हैं. मैं सोच रहा हूँ कि अगर मैं शादी नहीं करता तो आज जेल से छूट कर आजाद हो गया होता.

    जानदार ,नै चाल के चुटकुले एवं रोचक किस्से पांडे जी की कलम से -

    शादी न हुई उम्र कैद हो गई और वह तो दिन रात की करके १४ -१५ साल में कट जाती है ये ज़िन्दगी

    को काट देती है।

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