गुरुवार, 11 अक्तूबर 2012

चुहुल - ३४

(१)
एक समाजसेवी को उसके चाल-चरित्र से प्रसन्न होकर एक सिद्ध पुरुष ने एक ‘जादुई बोतल’ दी. बाद में जब समाजसेवी ने बोतल का ढक्कन खोला तो उसमें से एक ‘जिन्न’ बाहर आ गया और बोला, “मेरे आका, तुमने मुझे आजाद किया है इसलिए मैं तुम से बहुत खुश हूँ, बोलो तुम को क्या चाहिए? जो मांगोगे सब मिलेगा.”
समाजसेवी देश में चल रहे भ्रष्टाचार से बहुत दु:खी था, बोला, “मेरे देश से भ्रष्टाचार को मिटा दो, बस.”
इस पर आँखें तरेर कर जिन्न बोला, “तुम मुझे इस बोतल के अन्दर दुबारा डाल दो और ढक्कन लगा दो. ये जो काम तुम बता रहे हो बिलकुल असंभव है.”

(२)
एक कवि के पेट में भयंकर दर्द उठा करता था. वह दिन में कई बार बेहोश भी हो जाता था. उसके परिजन उसे एक बड़े डॉक्टर के पास ले गए. डॉक्टर ने उससे बीमारी के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसकी रचनाएँ पेट में घूमती हैं, सुननेवाला कोई नहीं है इसलिए यह समस्या पैदा हो रही है.
डॉक्टर ने मुस्कुराते हुए सहज में कह दिया, “चलो, मुझको सुना दो.”
काफी देर तक डॉक्टर के केबिन से कवि की आवाज आती रही, जब बहुत देर हो गयी तो स्टाफ ने दरवाजा खोल कर देखा तो पाया डॉक्टर साहब बेहोश पड़े हुए थे, और कवि महोदय गाये जा रहे थे.

(३)
एक सज्जन ने बहुत खर्चा करके अपना शानदार दुमंजिला घर बनवाया, जिसमें हर तरह की खूबसूरत बनावटें व सुविधाएँ थी. गृह-प्रवेश पर् सभी सगे-स्नेहियों को बुलाया गया, दावत दी गयी. मकान के बारे में लोग वाह वाह करते रहे. उनमें एक व्यक्ति ऐसा भी था जो हमेशा ही नकारात्मक सोचता था. हर चीज में खोट निकालता था. वह बोला, “और तो सब ठीक है पर ऊपरी मंजिल को जाने वाला जीना संकरा है, अगर ऊपर कोई मर गया तो नीचे उतारने में अड़चन आयेगी.”

(४)
एक आदमी अपने दोस्त से बोला, “यार, मेरी बीवी हर वक्त रुपये मांगती रहती है. परसों उसने १०० रूपये मांगे थे, कल २०० रूपये और आज ३०० सौ रुपये.”
दोस्त ने ताज्जुब करते हुए पूछा, “हद हो गयी, इतने रुपयों से वह करती क्या है?”
“मालूम नहीं भाई, पर मैंने उसे अभी तक दिये नहीं.”

(५)
एक स्त्री शिकायत के स्वर में अपने पति से बोली, “कल रात आप नींद में मुझे और मेरे पीहर वालों को बहुत भद्दी भद्दी गालियाँ दे रहे थे. मैंने साफ़ साफ़ सुना.”
पति बोला, “कल रात किस उल्लू के पट्ठे को नींद आई थी.”

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