बुधवार, 17 अप्रैल 2013

झुन झुन कटोरा

झुन झुन कटोरा (via thinkingparticle.com)
आपने आगरा जाकर मुग़ल बादशाह शाहजहां और उनकी प्यारी बेगम मुमताज महल की प्रेम की निशानी, उनका भव्य मकबरा, जिसे विश्व भर में ‘ताजमहल’ के नाम से जाना जाता है, अवश्य देखा होगा. ये अब विश्व धरोहर है और भारतीय पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है. ताजमहल के अलावा भी आगरा के आस पास कई अन्य मुगलकालीन स्मारक हैं, जैसे लालकिला, आरामबाग, एतमादुद्दौला का मकबरा, फतेहपुर सीकरी और ‘झुन झुन कटोरा’ आदि. ये सभी इमारतें पुरातत्व विभाग की  निगरानी में है. इनमें से झुन झुन कटोरा एक संरक्षित किन्तु उपेक्षित मकबरा.

यह उस निजाम नाम के भिश्ती का मकबरा है, जिसे मुग़ल बादशाह हुमायूं ने एक दिन के लिए बादशाहत दी थी. किस्सा यों है कि हुमायूं जब शेरशाह सूरी से जंग हार गया और अपनी जान बचाने के लिए घोड़े पर सवार होकर भाग रहा था, रास्ते में एक नदी आई थी, जिसमें उसका घोड़ा डूब कर मर गया. तब निहत्थे हुमायूं को निजाम भिश्ती ने अपने मशक के सहारे नदी पार कराया था. बाद में जब हुमायूं दोबारा शासन में आया तो उसने निजाम की खोज खबर करवाई और वह मिल भी गया. उसकी इच्छा पर उसे एक दिन के लिए बादशाह बनाया गया. निजाम भिश्ती ने अपने मशक के टुकड़े कटवा कर सिक्कों के रूप में जारी किया. मुग़ल कालीन इतिहास में इस मजेदार घटना को अहसानमंदी के रूप में लिखा गया है. अकबरनामा में भी इसका जिक्र है.

निजाम की मृत्यु के बाद उसको इज्जत बख्शने के लिए उसका गोल गुम्बज वाला एक छोटा सा मकबरा बनवाया गया. तब वहां आने जाने वालों के पीने के लिए एक मशक में पानी भर कर रखा रहता था. पानी पीने के लिए एक चांदी का कटोरा रखा रहता था. लोग भेंटस्वरूप यानि कि टिप के रूप में कटोरी में कौडियाँ डाल जाते थे, जो कि कटोरा हिलाने पर झुनझुने की तरह बजते थे. इसीलिये लोगों की जुबान पर झुन झुन कटोरा नाम चढ  गया. कहते हैं कि पिछले कई वर्षों से वहां कोई पर्यटक नहीं फटका. शायद प्रचार की कमी रही होगी.
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15 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बढ़िया जानकारी के लिए शुक्रिया |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
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  2. आज की ब्लॉग बुलेटिन गूगल पर बनाइये अपनी डिजिटल वसीयत - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  3. कमाल की जानकारी दी आपने ... आगरा तो अक्सर जाना होता है और हो न हो इस मकबरे के पास से भी कई बार निकालना हुआ होगा ... पर इस के बारे मे आज जानकारी मिली ... आभार !
    अगली बार आगरा जाने पर यहाँ का एक चक्कर जरूर लगाऊँगा !

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  4. जानकारी के लिए आभार .....आपके लेख बहुत ज्ञानवर्धक होते है .

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  5. बेहतरीन प्रस्तुति ...रोचक जानकारी के साथ !!
    पधारें बेटियाँ ...

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  6. kai bar jaankari ke abhaw men bhi log nahi jaa pate ....acchhi prastuti...

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  7. यह मकबरा भी गुमनाम हो चला होगा. आपका बहुत बहुत आभार कि आपने इतिहास के इसपहलू पर प्रकाश डाला.

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