शनिवार, 29 दिसंबर 2012

दामिनी के नाम

दामिनी !
तुम नेपथ्य में चली गयी. करोड़ों आँखों को नम कर गयी. देखो, मरना तो एक दिन सभी को है, मगर जिस तरह तुमको जाना पड़ा, उस पर पूरा देश शर्मिन्दा और घायल है. तुम जिस घनीभूत पीड़ा को झेल कर गयी हो, उसकी कसक यहाँ युगों तक महसूस की जाती रहेगी. जब जब आसमान में घनघोर घटाओं के बीच दामिनी दमकेगी, सुजनों के लिए प्रकाश और दरिंदों के लिए चाबुक का भान करायेगी.

तुम्हारे इस बलिदान से माताओं, बहुओं और बेटियों के लिए सुरक्षा की सोच उभर कर सामने आई है. तुम मातृशक्ति की प्रेरणा की मशाल बन गयी हो.

तुम एक सितारा बन गयी हो. दूर क्षितिज में अमर ज्योति बन कर बस गयी हो. हम तुम्हें सजल नेत्रों से निहारते रहेंगे, पर तुम्हारे चले जाने का बहुत दर्द तो है. ये शब्द्पुष्प विनम्र श्रद्धांजलि के रूप में तुम्हें अर्पित हैं.
***

8 टिप्‍पणियां:

  1. सबसे ज्यादा शरम (शर्म ) की बात है प्रेस कोंसिल आफ इंडिया के काटजू साहब (पूर्व न्यायाधीश )का बयान :निर्भया के अलावा भारत के सामने और भी मुद्दे हैं (बतलाएं काटजू साहब एक आदि गिनाएं ,आधी

    आबादी की पूरी सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा हो तो ज़रूर बतलाएं ).


    आपने विचारणीय मुद्दे उठाए हैं .यह बलात्कार भारत के प्रजातंत्र के साथ है अपराधी निर्भय हैं .बलात्कार ज़ारी हैं .


    खामोश अदालत ज़ारी है ?

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  2. सबसे ज्यादा शरम (शर्म ) की बात है प्रेस कोंसिल आफ इंडिया के काटजू साहब (पूर्व न्यायाधीश )का बयान :निर्भया के अलावा भारत के सामने और भी मुद्दे हैं (बतलाएं काटजू साहब एक आदि गिनाएं ,आधी

    आबादी की पूरी सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा हो तो ज़रूर बतलाएं ).


    आपने विचारणीय मुद्दे उठाए हैं .यह बलात्कार भारत के प्रजातंत्र के साथ है अपराधी निर्भय हैं .बलात्कार ज़ारी हैं .


    खामोश अदालत ज़ारी है ?

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  3. शुभ भावना ,शुभकामना लिए आई है आपकी पोस्ट ,सानंद रहें सेहत मंद रहें कुछ नया करें 2013 में यही शुभेच्छा है .आभार आपकी सद्य टिप्पणियों का .

    सार्थक संकल्पों की याद दिलाती है यह पोस्ट नए साल में .मुद्दा एक ही है आधी आबादी की पूरी सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए .

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  4. भारत शर्मसार है, कहने को अब बाकि क्या है....???

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